यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली
सूर्यपुत्री एवं यम की बहन पावन सलिला यमुना जिसकी परंपरा में प्रेरणा, जीवन
और दिव्य भाव समाहित हैं। यशोदानंदन कन्हैया की बाललीलाओं से लेकर षोडश कला में
निपुण अवतारी पुरुष तक कितने ही प्रसंग यमुना और कालिंदी से जुड़े हैं।
3 राज्यों से गुज़रने वाली यमुना कोटि-कोटि मानवों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली रही है... किन्तु भौतिकता और आधुनिकता की चकाचौंध में सब भूलकर हमने इस पवित्र नदी को प्रदूषित करने मेंकोई कसर नहीं छोड़ी.. घरों से निकलने वाला वेस्ट या सीवेज उद्योगों से निकलने वाले केमिकल और टॉक्सिक आदि ने यमुना के आचमन वाले शुद्ध जल की गुणवत्ता को ही एक दृष्टांत बना दिया इससे नदी का इकोसिस्टम पूरी तरह से बिगड़ गया.. यमुना नदी में अगर कुछ दिखाई देता था तो बस काला पानी और और उसके ऊपर सफेद झाग। लेकिन जब समय बदला और कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान यमुना नदी न केवल अपने मूल रूप में प्रवाहित होती दिख रही है बल्कि इससे विलुप्त हुए कई दुर्लभ देशी-विदेशी पक्षी भी दिखने लगे हैं.. लगभग 1400 किमी लंबी यमुना नदी के साफ पानी में इन दिनों मछलियां अठखेलियाँ करती दिख रही हैं.. हीरोन, इबिस पेंटेड स्टार्क जैसे तमाम देसी विदेशी पक्षी अब दशकों बाद पुनः यमुना नदी के आसपास दिखने लगे हैं।
वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़
इंडिया-देहरादून के संरक्षण अधिकारी डॉ राजीव चौहान पिछले 30 साल से यमुना नदी को
स्टडी कर रहे हैं.. उनके अनुसार -
"मैं वर्ष 2000 से यमुना एक्शन
प्लान से जुड़ा हुआ हूं और मैंने इस नदी को कभी साफ नहीं देखा है.मैं नदियों पर
लॉकडाउन का प्रभाव देखकर हैरान हूं। ”
इसके अलावा, Delhi Pollution Control Committee की खोज के अनुसार, दिल्ली में लॉकडाउन से पहले और बाद के आंकड़ों में तुलना की गयी, जिसके बाद यमुना के 33 प्रतिशत ज्यादा साफ़ होने की बात सामने आई. साथ ही मथुरा के पास इसके पानी की गुणवत्ता सुधरने की बात कही गयी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के अनुसार लॉकडाउन के दौरान ताज़े पानी की उपलब्धता में वृद्धि और औद्योगिक कचरा नहीं होने के कारण यमुना के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है... दिल्ली के आवासीय क्षेत्रों में स्थित 28 औद्योगिक क्लस्टर और उद्योगों से औद्योगिक कचरा भी लॉकडाउन के दौरान बंद रहा... आवासीय क्षेत्रों में 51,000 से अधिक उद्योग हैं। लॉकडाउन के दौरान पूजा सामग्री, ठोस कचरा नहीं डाले जाने, नहाने और कपड़े नहीं धोने के वजह से पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।


No comments:
Post a Comment