Friday, 5 March 2021

ज्ञान का दीपक जला रही है विद्या भारती

 

एक बेहतर मनुष्य के निर्माण में अच्छी शिक्षा के लिए जहां पाठ्य पुस्तकें जरूरी होती हैं वहीं जरूरी होता है उसका सर्वांगीण विकास। फिर बात चाहे खेल की हो, योग-व्यायाम, स्वास्थ्य,व्यक्तित्व को समाज के अनुसार निखारने की, सहपाठियों के साथ अच्छे तालमेल और सलीके की। इन सबके साथ उसे पाठ्य-पुस्तकों का कितना गहरा ज्ञान है।  एक छात्र की सफलता इन्हीं सब चीजों पर निर्भर करती है। लेकिन क्या वर्तमान में ज्यादातर विद्यालय विशेषकर अंग्रेजी मीडियम के स्कूल इतनी मोटी फीस लेकर भी ऐसी शिक्षा दे पा रहे हैं? लेकिन इस सबके बावजूद पूरे भारत में ऐसे आदर्श विद्यालयों की एक लंबी श्रृंखला मौजूद है जो शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन ला रही है।  यह श्रृंखला है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के विद्यालयों की। 


विद्या भारती के तहत, हजारों शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं जिनमें शिशुवाटिका, सरस्वती शिशु मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, वरिष्ठ माध्यमिक, संस्कार केंद्र, एकल विद्यालय, पूर्ण एवं अर्द्ध आवासीय विद्यालय और महाविद्यालय शामिल हैं। 

आंकड़ों के अनुसार देशभर में विद्या भारती के लगभग 12830 औपचारिक विद्यालय एवं 11,353 अनौपचारिक इकाइयां हैं। इन विद्यालयों में लगभग 34 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। यहाँ जाति, मत, पंथ, सम्प्रदाय के भाव से ऊपर सभी धर्मों के बच्चों को एक समान शिक्षा दी जाती है। विद्यालयों में मुस्लिम व ईसाई वर्ग के लगभग 80 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। पिछले कई वर्ष से मामला चाहे बोर्ड परीक्षा टॉप का हो या फिर खेल या समाज के अन्य क्रियाकलापों का प्रत्येक क्षेत्र में इन छात्रों ने अपनी प्रवीणता सिद्ध करके दिखाई है। 



वहीं कोरोनाकाल में भी विद्या भारती द्वारा ऑनलाइन एवं तकनीकी रूप से पिछड़े गांव-गांव जाकर शारीरिक दूरी बनाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। विद्या भारती के स्कूलों से ही छात्र-छात्राओं की नींव मजबूत होती है। यहां के बच्चे शिक्षा के साथ संस्कार भी ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि आज भी अभिभावक अपने बच्चों अत्याधुनिक महंगे स्कूलों में पढ़ाने के बजाए विद्या भारती के विद्यालयों में पढ़ाना पसंद करते हैं। वास्तव में शिक्षा के आदर्श मानदंडों पर खरे उतरकर छात्रों के जीवन को समग्र रूप से संवारते-निखारते हुए विद्या भारती अपने विद्यालयों के माध्यम से देश के लिए सभ्य एवं आदर्श नागरिक के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है। 



Wednesday, 17 February 2021

LAC पर डिसएंगेजमेंट : ड्रैगन ने पैर पीछे खींचे

 

चीन को लेकर सरकार के भरोसे पर विपक्ष भले ही कई प्रकार के सवाल उठाए। लेकिन वहाँ की हकीकत जानकार आपको सुकून मिलेगा... पूर्वी लद्दाख की पैंगॉन्ग लेक से चीनी आर्मी पीछे हटने लगी है। भारतीय सेना ने डिसएंगेजमेंट की फोटो और वीडियो जारी किया है...  इतना ही नहीं चीनी सेना ने इन इलाकों से अपने बनाए बंकर भी तोड़ डाले हैं। साथ ही टेंट, तोप और गाड़ियां भी हटा ली हैं... और भारतीय सैनिक भी डिसइंगेज हो रहे हैं। 

भारतीय सेना भी पूर्वी लद्दाख में पैंगॉन्ग झील क्षेत्र के किनारे भारत-चीन के बीच पिछले 10 महीने से तनाव था। 15 जून को गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष भी हो गया था। यही नहीं, अगस्त-सितंबर में 45 साल बाद भारत-चीन सीमा पर गोलियां भी चलीं। हालांकि, सितंबर से ही भारत ने चीन के साथ डिप्लोमैटिक और मिलिट्री लेवल की बातचीत जारी रखी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 फरवरी को संसद में डिसएंगेजमेंट समझौते की जानकारी दी थी... 


अगर देखा जाए तो भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है कि सीमा पर किसी भी प्रकार की दखलअंदाजी भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। शायद चीन भी अब भली-भांति जान चुका है कि 1962 वाला नहीं, ये है 2020-21 का भारत है जो जीतना जानता है। 

Friday, 5 June 2020

धीर समीरे यमुना तीरे

                       

                                

यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली सूर्यपुत्री एवं यम की बहन पावन सलिला यमुना जिसकी परंपरा में प्रेरणा, जीवन और दिव्य भाव समाहित हैं।  यशोदानंदन कन्हैया की बाललीलाओं से लेकर षोडश कला में निपुण अवतारी पुरुष तक कितने ही प्रसंग यमुना और कालिंदी से जुड़े हैं। 

3 राज्यों से गुज़रने वाली यमुना कोटि-कोटि मानवों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने वाली रही है... किन्तु भौतिकता और आधुनिकता की चकाचौंध में सब भूलकर हमने इस पवित्र नदी को प्रदूषित करने मेंकोई कसर नहीं छोड़ी..  घरों से निकलने वाला वेस्ट या सीवेज उद्योगों से निकलने वाले केमिकल और टॉक्सिक आदि ने यमुना के आचमन वाले शुद्ध जल  की गुणवत्ता को ही एक दृष्टांत बना दिया इससे नदी का इकोसिस्टम पूरी तरह से बिगड़ गया.. यमुना नदी में अगर कुछ दिखाई देता था तो बस काला पानी और और उसके ऊपर सफेद झाग। लेकिन जब समय बदला और कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान यमुना नदी न केवल अपने मूल रूप में प्रवाहित होती दिख रही है  बल्कि इससे विलुप्त हुए  कई दुर्लभ देशी-विदेशी पक्षी भी दिखने लगे हैं..   लगभग 1400 किमी लंबी यमुना नदी के साफ पानी में इन दिनों मछलियां अठखेलियाँ करती  दिख रही हैं..  हीरोन, इबिस पेंटेड स्टार्क जैसे तमाम देसी विदेशी पक्षी अब दशकों बाद  पुनः यमुना नदी के आसपास दिखने लगे हैं। 

वाइल्डलाइफ इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया-देहरादून के संरक्षण अधिकारी डॉ राजीव चौहान पिछले 30 साल से यमुना नदी को स्टडी कर रहे हैं.. उनके अनुसार -

"मैं वर्ष 2000 से यमुना एक्शन प्लान से जुड़ा हुआ हूं और मैंने इस नदी को कभी साफ नहीं देखा है.मैं नदियों पर लॉकडाउन का प्रभाव देखकर हैरान हूं। 

इसके अलावा, Delhi Pollution Control Committee की खोज के अनुसारदिल्ली में लॉकडाउन से पहले और बाद के आंकड़ों में तुलना की गयी, जिसके बाद यमुना के 33 प्रतिशत ज्यादा साफ़ होने की बात सामने आई. साथ ही मथुरा के पास इसके पानी की गुणवत्ता सुधरने की बात कही गयी। 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) के अनुसार लॉकडाउन के दौरान ताज़े पानी की उपलब्धता में वृद्धि और औद्योगिक कचरा नहीं होने के कारण यमुना के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ है... दिल्ली के आवासीय क्षेत्रों में स्थित 28 औद्योगिक क्लस्टर और उद्योगों से औद्योगिक कचरा भी लॉकडाउन के दौरान बंद रहा... आवासीय क्षेत्रों में 51,000 से अधिक उद्योग हैं। लॉकडाउन के दौरान पूजा सामग्री, ठोस कचरा नहीं डाले जाने, नहाने और कपड़े नहीं धोने के वजह से पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। 



प्रकृति के अंदर इतनी शक्ति है कि वह जब चाहे स्वयं को स्वतः ठीक कर मौलिक रूप धारण कर लेती है ,इसे बिगाड़ने वाला तो मनुष्य ही है .. है..यही वह यमुना है जिसका माहात्म्य ऋग्वेद से लेकर श्रीमद्भागवत और पद्म पुराण जैसे हमारे सम्पूर्ण वांग्मय में वर्णित है..मानव जीवन लेकर सब कुछ पाने के बाद भी यदि यमुना में स्नान का अवसर प्राप्त नहीं किया तो सब निरर्थक है- " मनुष्यानाम हतम जन्म कालिंदी मज्जनं बिना, भस्मी भवन्ति सर्वाणि यमुना मज्जनानृप" शायद   यही कारण  है कि यमुना नदी जिस पर हजारों करोड़ रुपये सरकार द्वारा खर्च किये गये..फिर भी उसकी हालत गंदे नाले के सामान बनी रही लेकिन ..लॉकडाउन के चलते 2 महीने में ही यमुना का पानी स्वच्छ हो गया है... यह सब को दिख गया है कि नदियाँ  किसी प्राकृतिक आपदा के कारण  नहीं  बल्कि मनुष्य के स्वार्थ और संवेदनहीनता के कारण बदहाल  है..   यह संकट आधुनिक सभ्यता का संकट है और संस्कृतिविहीन समाज का भी....सरकार के साथ-साथ देश के आम नागरिकों को भी यमुना को स्वच्छ व निर्मल बनाए रखने कासंकल्प लेना चाहिए ,यह सबका राष्ट्रीय कर्तव्य है।