एक बेहतर मनुष्य के निर्माण में अच्छी शिक्षा के लिए जहां पाठ्य पुस्तकें जरूरी होती हैं वहीं जरूरी होता है उसका सर्वांगीण विकास। फिर बात चाहे खेल की हो, योग-व्यायाम, स्वास्थ्य,व्यक्तित्व को समाज के अनुसार निखारने की, सहपाठियों के साथ अच्छे तालमेल और सलीके की। इन सबके साथ उसे पाठ्य-पुस्तकों का कितना गहरा ज्ञान है। एक छात्र की सफलता इन्हीं सब चीजों पर निर्भर करती है। लेकिन क्या वर्तमान में ज्यादातर विद्यालय विशेषकर अंग्रेजी मीडियम के स्कूल इतनी मोटी फीस लेकर भी ऐसी शिक्षा दे पा रहे हैं? लेकिन इस सबके बावजूद पूरे भारत में ऐसे आदर्श विद्यालयों की एक लंबी श्रृंखला मौजूद है जो शिक्षा के क्षेत्र में एक क्रान्तिकारी परिवर्तन ला रही है। यह श्रृंखला है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रेरणा से चलने वाले विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के विद्यालयों की।
विद्या भारती के तहत, हजारों शिक्षण संस्थान संचालित होते हैं जिनमें शिशुवाटिका, सरस्वती शिशु मंदिर, सरस्वती विद्या मंदिर, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, वरिष्ठ माध्यमिक, संस्कार केंद्र, एकल विद्यालय, पूर्ण एवं अर्द्ध आवासीय विद्यालय और महाविद्यालय शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार देशभर में विद्या भारती के लगभग 12830 औपचारिक विद्यालय एवं 11,353 अनौपचारिक इकाइयां हैं। इन विद्यालयों में लगभग 34 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। यहाँ जाति, मत, पंथ, सम्प्रदाय के भाव से ऊपर सभी धर्मों के बच्चों को एक समान शिक्षा दी जाती है। विद्यालयों में मुस्लिम व ईसाई वर्ग के लगभग 80 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। पिछले कई वर्ष से मामला चाहे बोर्ड परीक्षा टॉप का हो या फिर खेल या समाज के अन्य क्रियाकलापों का प्रत्येक क्षेत्र में इन छात्रों ने अपनी प्रवीणता सिद्ध करके दिखाई है।
वहीं कोरोनाकाल में भी विद्या भारती द्वारा ऑनलाइन एवं तकनीकी रूप से पिछड़े गांव-गांव जाकर शारीरिक दूरी बनाकर कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। विद्या भारती के स्कूलों से ही छात्र-छात्राओं की नींव मजबूत होती है। यहां के बच्चे शिक्षा के साथ संस्कार भी ग्रहण करते हैं। यही कारण है कि आज भी अभिभावक अपने बच्चों अत्याधुनिक महंगे स्कूलों में पढ़ाने के बजाए विद्या भारती के विद्यालयों में पढ़ाना पसंद करते हैं। वास्तव में शिक्षा के आदर्श मानदंडों पर खरे उतरकर छात्रों के जीवन को समग्र रूप से संवारते-निखारते हुए विद्या भारती अपने विद्यालयों के माध्यम से देश के लिए सभ्य एवं आदर्श नागरिक के निर्माण में अहम भूमिका निभा रही है।





